Breaking News

5/recent/ticker-posts

सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करने और सिखाने वाले ही उड़ा रहे हैं धज्जिया, आइए पढ़ते हैं इस रिपोर्ट में



मीडिया भारतीय संविधान का चौथा स्तंभ माना जाता है । सुशांत सिंह राजपूत का मर्डर केस अभी काफी चर्चित है और बेहद लोकप्रिय पूरा देश यही जानना चाहता है कि आखिर सुशांत सिंह राजपूत का मर्डर था या सुसाइड?

सीबीआई(CBI) और एनसीबी(NCB) दोनों इस मामले में अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रही है ताकि जनता को यह मालूम चल सके की सुशांत सिंह राजपूत का मर्डर हुआ था या सुसाइड था। इनसे पूरे देश को उम्मीद है और उनके परिवार को भी। उनके परिवार को और हम सबको सीबीआई और एनसीबी से न्याय की उम्मीद है और हम सब यही चाहते हैं कि जल्द से जल्द हमें न्याय से परिचय कराया जाए इस मामले में। परंतु कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि इस न्याय पाने की रेस में हम इंसानियत को भूल जाते हैं।





सुशांत सिंह राजपूत सुशांत सिंह राजपूत मर्डर केस के मुख्य आरोपी अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को सीबीआई और एनसीपी के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। 
उन्हें प्रतिदिन समन भेजा जा रहा है और उन्हें इस संबंध का पालन करते हुए सीबीआई और एनसीबी के दफ्तर  में निर्धारित समय पर प्रस्तुत होना पड़ता है।

मीडिया का काम है सवाल पूछना और सच को जनता के सामने लाना परंतु उनका रिया चक्रवर्ती के साथ व्यवहार काफी सराहनीय नहीं है। 
ऐसा देखा गया है कि एनसीबी के दफ्तर के बाहर रिया चक्रवर्ती के साथ मीडिया कर्मियों ने उनसे सवाल पूछने के लिए जबरदस्ती की और उनके सब्र का इम्तिहान लिया। वह भी तब जब पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए सरकार के तरफ से गाइडलाइंस आ रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी कोरोना से लड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को ही सबसे बड़ा हथियार बताया है।

क्या यह वही देश है जहां जहां महिलाओं को को आत्म निर्भर बनाने की बात की जाती है? क्या यह वही देश है जहां महिलाओं के सम्मान के लिए कैंडल मार्च निकाले जाते हैं? 

यदि हाँ तो हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि रिया चक्रवर्ती भी एक महिला हैं और उनके सम्मान का भी हमें ख्याल रखना चाहिए।

Post a Comment

0 Comments