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DEMOCRACY: जानिए क्या है ग्राम सभा और ग्राम सभा के कार्य, विस्तार से


हमने पिछले भाग में समझ लिया की पंचायती राज क्या होता , पंचायत का गठन किस प्रकार  होता है, साथ ही सचिव कौन होता है, सचिव का काम क्या है, ग्राम सभा की बैठक किस प्रकार बुलाई जाती है इत्यादि। 

यहाँ से पढ़े - ग्राम पंचायत क्या है, ग्राम पंचायत का गठन कैसे होता है, सचिव का क्या काम है, ग्राम सभा की बैठक कैसे बुलाई जाती है

हमारे गणतंत्र में चार सभायें हैं - लोक सभा , राज्यसभा , विधानसभा एवं ग्रामसभा। इन चारों सभाओं में भी ग्राम सभा एक मूल सभा है क्योंकि, पहली तीन सभाओं में जनप्रतिनिधि हमारे द्वारा प्रत्यक्ष रूप अथवा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। किन्तु ग्राम सभा तो स्वयं जनता की सभा होती है। ग्राम सभा में जनता स्वयं उपस्थित होती और संचालन जनता के प्रत्यक्ष में ही होता है। इसीलिए ग्राम सभा को पंचायती राज की मूल संस्था है एवं यह सभा सर्वोपरि है। 

अब सवाल यह है की ग्राम सभा किसे कहते हैं ?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(b) में से ग्राम सभा परिभाषित हुई है। ग्राम सभा पंचायतीराज की मूलभूत इकाई है। ग्राम सभा किसी एक गाँव या पंचायत का चुनाव करने वाले गाँवों का समूह जिनका उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो जिनका नाम गाँव की मतदाता सूचि में हो उनके द्वारा गठित सभा को ग्राम सभा कहते हैं। यह सभा एक पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी वयस्कों की सभा होती है। हो सकता है उसमें केवल एक गाँव हो या एक से अधिक। 

ग्राम सभा का सदस्य 

कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो, जिसे मतदान(वोट ) करने का अधिकार प्राप्त हो और जिसका नाम गाँव के मतदाता सूचि में हो। वह व्यक्ति ग्राम सभा का सदस्य होता है। वह व्यक्ति जिसका नाम गाँव के मतदाता सूचि में नहीं हो, ग्राम सभा का सदस्य नहीं होता। 

ग्राम सभा की संरचना 

ग्राम सभा की संरचना ग्राम सभा में राज्य निर्वाचन आयोग (पंचायत एवं स्थानीय निकाय/संस्था ) द्वारा तैयार पंचायत क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज सभी लोग सदस्य होते हैं। ग्राम सभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना जरूरी है। प्रत्येक ग्राम सभा में एक अध्यक्ष होगा, जो ग्राम प्रधान, सरपंच अथवा मुखिया कहलाता है, तथा कुछ अन्य सदस्य होंगे। ग्राम सभा में 1000 की आबादी तक 1 ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य), 2000की आबादी तक 11 सदस्य तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य होंगे।

ग्राम सभा का स्थल, समय और स्थान

ग्राम सभा का संचालन ग्राम पंचायत क्षेत्र में ऐसे स्थान पर किया जाना चाहिए जहां सभी सदस्यों के लिए बैठना सुविधाजनक हो। ग्राम पंचायत में अनेक गांव होने की स्थिति में ग्राम सभा का संचालन एक के बाद एक सभी गांवों में रोटेशन के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्राम सभा का आयोजन दिन के समय किसी भी समय, यानी सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले किया जा सकता है।

ग्राम सभा की बैठक कब और कैसे की जाती है 

ग्राम सभा की बैठक एक वर्ष में कम से कम 4 बार कराई जानि जरूरी है। या सरल भाषा में कहें तो हर तीन माह पर ग्राम सभा की बैठक कराई जानी चाहिए। ग्राम सभा बैठक के लिए 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त और 02 अक्टूबर तय की गई है। और आवश्यकता पड़ने पर ग्राम सभा की बैठक कभी भी और जितनी बार मुखिया या सदस्य चाहें तो प्रक्रियानुसार बुला सकते हैं। 

ग्राम सभा बैठक का आयोजन करने की ज़िम्मेदारी मुखिया की होती है। यदि मुखिया बैठक का आयोजन नहीं कर पाते हैं तो पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी (BDO ) द्वारा बैठक का आयोजन होता है। मुखिया की असमर्थता की दशा में ग्राम सभा के सदस्यगण को कार्यपालक पदाधिकारी को सूचित कर ग्राम सभा को बुलाने का अधिकार है। कार्यपालक पदाधिकारी ऐसी बैठक में अपने स्थान किसी सरकारी सेवक को भेज सकते हैं।    

ग्राम सभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना जरूरी है। प्रत्येक ग्राम सभा में एक अध्यक्ष होगा, जो ग्राम प्रधान, सरपंच अथवा मुखिया कहलाता है, तथा कुछ अन्य सदस्य होंगे। ग्राम सभा में 1000 की आबादी तक 1 ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य), 2000की आबादी तक 11 सदस्य तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य होंगे।

यदि बैठक में कोरम (नियमतः निर्धारित सदस्य संख्या की उपस्थिति) पूरा नहीं होता है तो एक घंटा इंतजार कर बैठक को स्थगित किया जा सकता है। स्थगित किया गया बैठक अगले दिन अथवा आने वाले किसी दिन के लिए निर्धारित किया जा सकता है। स्थगित बैठक के बाद की बैठक कोरम (नियमतः निर्धारित सदस्य संख्या की उपस्थिति) कुल सदस्यों के 40 वें भाग से ही पूरा होगा। 

ग्राम सभा की बैठक मुखिया के अध्यक्षता में होती है। मुखिया के गैरहाज़िरी में उप मुखिया के अध्यक्षता में बैठक होती है। 

 ग्राम सभा के कार्य 

  •  ग्राम सभा गाँव के हित में योजना बनाती है, और उन्हें लागू करती है।
  •  ग्राम सभा ग्राम पंचायत का बजट पारित कर एकत्रण के नियम बनाती है। 
  • सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करती है। लाभार्थियों का चयन करती है।
  •  जनसुनवाई के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाती है।
  •  समाज के सभी वर्गों मे मेल-जोल व एकता बढ़ाने का काम करती है।
  •  प्रौढ़ शिक्षा का कार्यक्रम की व्यवस्था करती है।
  •  अन्य मामले जो पहले से तय हों (जैसे परिवार कल्याण, पर्यावरण सुधार,टीकाकरण)


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